श्रीकृष्ण के नाम-जप में विरह का भाव — शिक्षाष्टकम् श्लोक 6 का गहन संदेश

Shikshastaka sloka 6

भक्ति के मार्ग में एक क्षण ऐसा आता है, जब “नाम” सिर्फ़ नाम नहीं रह जाता… वह स्वयं भगवान बन जाता है। श्री चैतन्य महाप्रभु हमें अपने शिक्षाष्टकम् श्लोक 6 में इसी पराकाष्ठा की अनुभूति से परिचित कराते हैं— नयनं गलदश्रुधारयावदनं गद्गदरुद्धया गिरापुलकैर् निचितं वपुःकदा तव नाम-ग्रहणे भविष्यति सरल अर्थ:प्रभु, कब वह क्षण आएगा, जब … Read more