आध्यात्मिक ज्ञान मन से नहीं गढ़ा जाता, वह गुरु–शिष्य परंपरा से प्रवाहित होता है।

आध्यात्मिक ज्ञान मन से नहीं गढ़ा जाता

“आध्यात्मिक ज्ञान मन से नहीं गढ़ा जाता, वह गुरु–शिष्य परंपरा से प्रवाहित होता है।”यह वाक्य आध्यात्मिक जीवन का मूल नियम प्रकट करता है। आध्यात्मिक ज्ञान कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे मनुष्य अपनी कल्पना, तर्क या बौद्धिक क्षमता से बना ले।मन का स्वभाव है—कल्पना करना, विश्लेषण करना और निष्कर्ष गढ़ना।लेकिन दिव्य सत्य मन की सीमा … Read more

आध्यात्मिक ज्ञान बुद्धि से अर्जित नहीं होता, वह गुरु की कृपा से हृदय में प्रकट होता है।

आध्यात्मिक ज्ञान बुद्धि से अर्जित नहीं होता, वह गुरु की कृपा से हृदय में प्रकट होता है।

दिव्य ज्ञान कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे मनुष्य अपनी बुद्धि के बल पर जीत ले।तर्क, विश्लेषण और बौद्धिक क्षमता हमें अधिकतम शब्दों और अवधारणाओं तक ही ले जा सकती है, परंतु भगवान का तत्त्व, उनका स्वरूप, उनका रस—यह सब बुद्धि की सीमा के परे है। बुद्धि का स्वभाव है—तोलना, तुलना करना, और निर्णय देना।जबकि … Read more