आध्यात्मिक ज्ञान मन से नहीं गढ़ा जाता, वह गुरु–शिष्य परंपरा से प्रवाहित होता है।
“आध्यात्मिक ज्ञान मन से नहीं गढ़ा जाता, वह गुरु–शिष्य परंपरा से प्रवाहित होता है।”यह वाक्य आध्यात्मिक जीवन का मूल नियम प्रकट करता है। आध्यात्मिक ज्ञान कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे मनुष्य अपनी कल्पना, तर्क या बौद्धिक क्षमता से बना ले।मन का स्वभाव है—कल्पना करना, विश्लेषण करना और निष्कर्ष गढ़ना।लेकिन दिव्य सत्य मन की सीमा … Read more